श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

त्वद‍्भ्रातर्युत्तमे नष्टे मृगयायां तु तन्मनाः।

अन्वेषन्ती वनं माता दावाग्‍निं सा प्रवेक्ष्यति॥ २३

tvadbhrātaryuttame naṣṭe mṛgayāyāṃ tu tanmanāḥ|

anveṣantī vanaṃ mātā dāvāgniṃ sā pravekṣyati|| 23

अर्थ

आगे चलकर किसी समय तेरा भाई उत्तम शिकार खेलता हुआ मारा जायगा, तब उसकी माता सुरुचि पुत्र-प्रेममें पागल होकर उसे वनमें खोजती हुई दावानलमें प्रवेश कर जायगी॥ २३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें