श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.22

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

प्रस्थिते तु वनं पित्रा दत्त्वा गां धर्मसंश्रयः।

षट्त्रिंशद्वर्षसाहस्रं रक्षिताव्याहतेन्द्रियः॥ २२

prasthite tu vanaṃ pitrā dattvā gāṃ dharmasaṃśrayaḥ|

ṣaṭtriṃśadvarṣasāhasraṃ rakṣitāvyāhatendriyaḥ|| 22

अर्थ

यहाँ भी जब तेरे पिता तुझे राजसिंहासन देकर वनको चले जायँगे; तब तू छत्तीस हजार वर्षतक धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करेगा। तेरी इन्द्रियोंकी शक्ति ज्यों-की-त्यों बनी रहेगी॥ २२॥

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