यहाँ भी जब तेरे पिता तुझे राजसिंहासन देकर वनको चले जायँगे; तब तू छत्तीस हजार वर्षतक धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करेगा। तेरी इन्द्रियोंकी शक्ति ज्यों-की-त्यों बनी रहेगी॥ २२॥
प्रस्थिते तु वनं पित्रा दत्त्वा गां धर्मसंश्रयः।
षट्त्रिंशद्वर्षसाहस्रं रक्षिताव्याहतेन्द्रियः॥ २२
यहाँ भी जब तेरे पिता तुझे राजसिंहासन देकर वनको चले जायँगे; तब तू छत्तीस हजार वर्षतक धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करेगा। तेरी इन्द्रियोंकी शक्ति ज्यों-की-त्यों बनी रहेगी॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 455) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/22/