श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.73

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

द्वितीयं च तथा मासं षष्ठे षष्ठेऽर्भको दिने।

तृणपर्णादिभिः शीर्णैः कृतान्‍नोऽभ्यर्चयद्विभुम्॥ ७३

dvitīyaṃ ca tathā māsaṃ ṣaṣṭhe ṣaṣṭhe'rbhako dine|

tṛṇaparṇādibhiḥ śīrṇaiḥ kṛtānno'bhyarcayadvibhum|| 73

अर्थ

दूसरे महीनेमें उन्होंने छः-छः दिनके पीछे सूखे घास और पत्ते खाकर भगवान्‌का भजन किया॥ ७३॥✎ 372 1323

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #372 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1323 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पवित्रता-पूर्वक → पवित्रतापूर्वक

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