श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.3

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तयोः समभवल्लोभो निकृतिश्‍च महामते।

ताभ्यां क्रोधश्‍च हिंसा च यद्दुरुक्तिः स्वसा कलिः॥ ३

tayoḥ samabhavallobho nikṛtiśca mahāmate|

tābhyāṃ krodhaśca hiṃsā ca yadduruktiḥ svasā kaliḥ|| 3

अर्थ

दम्भ और मायासे लोभ और निकृति (शठता)-का जन्म हुआ, उनसे क्रोध और हिंसा तथा उनसे कलि (कलह) और उसकी बहिन दुरुक्ति (गाली) उत्पन्‍न हुए॥ ३॥✎ 1321 1322

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1321 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति → निऋर्ऋति
  • #1322 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति → निर्ऋति

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