॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.6.17
पनसोदुम्बराश्वत्थप्लक्षन्यग्रोधहिंगुभिः ।
भूर्जैरोषधिभिः पूगै राजपूगैश्च जम्बुभिः॥ १७
panasodumbarāśvatthaplakṣanyagrodhahiṃgubhiḥ |
bhūrjairoṣadhibhiḥ pūgai rājapūgaiśca jambubhiḥ|| 17
अर्थ
कटहल, गूलर, पीपल, पाकर, बड़, गूगल, भोजवृक्ष, ओषध जातिके पेड़ (केले आदि, जो फल आनेके बाद काट दिये जाते हैं), सुपारी, राजपूग, जामुन, खजूर, आमड़ा, आम, पियाल, महुआ और लिसौड़ा आदि विभिन्न प्रकारके वृक्षों तथा पोले और ठोस बाँसके झुरमुटोंसे वह पर्वत बड़ा ही मनोहर मालूम होता है॥ १७-१८॥✎ 1318