श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.15

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

चूतैः कदम्बैर्नीपैश्‍च नागपुन्‍नागचम्पकैः।

पाटलाशोकबकुलैः कुन्दैः कुरबकैरपि॥ १५

cūtaiḥ kadambairnīpaiśca nāgapunnāgacampakaiḥ|

pāṭalāśokabakulaiḥ kundaiḥ kurabakairapi|| 15

अर्थ

आम, कदम्ब, नीप, नाग, पुन्‍नाग, चम्पा, गुलाब, अशोक, मौलसिरी, कुन्द, कुरबक, सुनहरे शतपत्र कमल, इलायची और मालतीकी मनोहर लताएँ तथा कुब्जक, मोगरा और माधवीकी बेलें भी उसकी शोभा बढ़ाती हैं॥ १५-१६॥✎ 1318

यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1318 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हैैं॥ → हैं॥

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