श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.31.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

नारद उवाच

तज्जन्म तानि कर्माणि तदायुस्तन्मनो वचः।

नृणां येनेह१ विश्वात्मा सेव्यते हरिरीश्‍वरः॥ ९

tajjanma tāni karmāṇi tadāyustanmano vacaḥ|

nṛṇāṃ yeneha viśvātmā sevyate harirīśvaraḥ|| 9

अर्थ

श्रीनारदजीने कहा—राजाओ! इस लोकमें मनुष्यका वही जन्म, वही कर्म, वही आयु, वही मन और वही वाणी सफल है, जिसके द्वारा सर्वात्मा सर्वेश्‍वर श्रीहरिका सेवन किया जाता है॥ ९॥✎ 427

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—येन हि।

    (मुद्रित पृष्ठ 571)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #427 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् की → श्रीभगवान्‌की

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