श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.31.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इति प्रचेतसां पृष्टो भगवान्‍नारदो मुनिः।

भगवत्युत्तमश्लोक आविष्टात्माब्रवीन्‍नृपान्॥ ८

iti pracetasāṃ pṛṣṭo bhagavānnārado muniḥ|

bhagavatyuttamaśloka āviṣṭātmābravīnnṛpān|| 8

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—भगवन्मय श्रीनारदजीका चित्त सर्वदा भगवान् श्रीकृष्णमें ही लगा रहता है। वे प्रचेताओंके इस प्रकार पूछनेपर उनसे कहने लगे॥ ८॥

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