स्तुवन्त्यहं कामवरान्दास्ये प्रज्ञां च शोभनाम्॥ १०
ye tu māṃ rudragītena sāyaṃ prātaḥ samāhitāḥ|
stuvantyahaṃ kāmavarāndāsye prajñāṃ ca śobhanām|| 10
अर्थ
जो लोग सायंकाल और प्रातःकाल एकाग्रचित्तसे रुद्रगीतद्वारा मेरी स्तुति करेंगे, उनको मैं अभीष्ट वर और शुद्ध बुद्धि प्रदान करूँगा॥ १०॥✎ 422
ये तु मां रुद्रगीतेन सायं प्रातः समाहिताः।
स्तुवन्त्यहं कामवरान्दास्ये प्रज्ञां च शोभनाम्॥ १०
जो लोग सायंकाल और प्रातःकाल एकाग्रचित्तसे रुद्रगीतद्वारा मेरी स्तुति करेंगे, उनको मैं अभीष्ट वर और शुद्ध बुद्धि प्रदान करूँगा॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 565) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने