जो पुरुष सायंकालके समय प्रतिदिन तुम्हारा स्मरण करेगा, उसका अपने भाइयोंमें अपने ही समान प्रेम होगा तथा समस्त जीवोंके प्रति मित्रताका भाव हो जायगा॥ ९॥✎ 422
योऽनुस्मरति सन्ध्यायां युष्माननुदिनं नरः।
तस्य भ्रातृष्वात्मसाम्यं तथा भूतेषु सौहृदम्॥ ९
जो पुरुष सायंकालके समय प्रतिदिन तुम्हारा स्मरण करेगा, उसका अपने भाइयोंमें अपने ही समान प्रेम होगा तथा समस्त जीवोंके प्रति मित्रताका भाव हो जायगा॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 565) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने