तुमलोगोंने बड़ी प्रसन्नतासे अपने पिताकी आज्ञा शिरोधार्य की है, इससे तुम्हारी कमनीय कीर्ति समस्त लोकोंमें फैल जायगी॥ ११॥✎ 422
यद्यूयं पितुरादेशमग्रहीष्ट मुदान्विताः।
अथो व उशती कीर्तिर्लोकाननु भविष्यति॥ ११
तुमलोगोंने बड़ी प्रसन्नतासे अपने पिताकी आज्ञा शिरोधार्य की है, इससे तुम्हारी कमनीय कीर्ति समस्त लोकोंमें फैल जायगी॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 565) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/30/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने