सुन्दरि! अवश्य ही मैं यह जानता हूँ कि तुम परमोन्नतिको प्राप्त हुए दक्षप्रजापतिको अपनी कन्याओंमें सबसे अधिक प्रिय हो। तथापि मेरी आश्रिता होनेके कारण तुम्हें अपने पितासे मान नहीं मिलेगा; क्योंकि वे मुझसे बहुत जलते हैं॥ २०॥✎ 1316
व्यक्तं त्वमुत्कृष्टगतेः प्रजापतेः
प्रियाऽऽत्मजानामसि सुभ्रु सम्मता।
अथापि मानं न पितुः प्रपत्स्यसे
मदाश्रयात्कः परितप्यते यतः॥ २०
सुन्दरि! अवश्य ही मैं यह जानता हूँ कि तुम परमोन्नतिको प्राप्त हुए दक्षप्रजापतिको अपनी कन्याओंमें सबसे अधिक प्रिय हो। तथापि मेरी आश्रिता होनेके कारण तुम्हें अपने पितासे मान नहीं मिलेगा; क्योंकि वे मुझसे बहुत जलते हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 418) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/3/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1316 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): दक्ष-प्रजापतिको → दक्षप्रजापतिको