दोनों प्रकारकी इन्द्रियोंके नायक मनको ही ग्यारहवाँ महाबली योद्धा जानना चाहिये। शब्दादि पाँच विषय ही पांचालदेश हैं, जिसके बीचमें वह नौ द्वारोंवाला नगर बसा हुआ है॥ ७॥✎ 1342
बृहद्बलं मनो विद्यादुभयेन्द्रियनायकम्।
पंचालाः पंच विषया यन्मध्ये नवखं पुरम्॥ ७
दोनों प्रकारकी इन्द्रियोंके नायक मनको ही ग्यारहवाँ महाबली योद्धा जानना चाहिये। शब्दादि पाँच विषय ही पांचालदेश हैं, जिसके बीचमें वह नौ द्वारोंवाला नगर बसा हुआ है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.29.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 553) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/29/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1342 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): वृत्तियों-वाला → वृत्तियोंवाला