श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.29.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

आधयो व्याधयस्तस्य सैनिका यवनाश्‍चराः।

भूतोपसर्गाशुरयः प्रज्वारो द्विविधो ज्वरः॥ २३

ādhayo vyādhayastasya sainikā yavanāścarāḥ|

bhūtopasargāśurayaḥ prajvāro dvividho jvaraḥ|| 23

अर्थ

आधि (मानसिक क्लेश) और व्याधि (रोगादि शारीरिक कष्ट) ही उस यवनराजके पैदल चलनेवाले सैनिक हैं तथा प्राणियोंको पीड़ा पहुँचाकर शीघ्र ही मृत्युके मुखमें ले जानेवाला शीत और उष्ण दो प्रकारका ज्वर ही प्रज्वार नामका उसका भाई है॥ २३॥

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