प्रियवर! ये पुरुष मेरे सखा और स्त्रियाँ मेरी सहेलियाँ हैं तथा जिस समय मैं सो जाती हूँ, यह सर्प जागता हुआ इस पुरीकी रक्षा करता रहता है ॥ ३५॥✎ 13361337
एते सखायः सख्यो मे नरा नार्यश्च मानद।
सुप्तायां मयि जागर्ति नागोऽयं पालयन् पुरीम्॥ ३५
प्रियवर! ये पुरुष मेरे सखा और स्त्रियाँ मेरी सहेलियाँ हैं तथा जिस समय मैं सो जाती हूँ, यह सर्प जागता हुआ इस पुरीकी रक्षा करता रहता है ॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 537) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
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