सब-के-सब प्रचेता जलमें खड़े रहकर भगवान् रुद्रके बताये स्तोत्रका जप करते हुए दस हजार वर्षतक तपस्या करते रहे॥ २॥✎ 417
रुद्रगीतं भगवतः स्तोत्रं सर्वे प्रचेतसः।
जपन्तस्ते तपस्तेपुर्वर्षाणामयुतं जले॥ २
सब-के-सब प्रचेता जलमें खड़े रहकर भगवान् रुद्रके बताये स्तोत्रका जप करते हुए दस हजार वर्षतक तपस्या करते रहे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 533) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#417 शब्दोंके बीचका स्थान: प्रकारभगवान् → प्रकार भगवान्