इन दिनों राजा प्राचीनबर्हिका चित्त कर्मकाण्डमें बहुत रम गया था। उन्हें अध्यात्मविद्या-विशारद परम कृपालु नारदजीने उपदेश दिया॥ ३॥✎ 417
प्राचीनबर्हिषं क्षत्तः कर्मस्वासक्तमानसम्।
नारदोऽध्यात्मतत्त्वज्ञः कृपालुः प्रत्यबोधयत्॥ ३
इन दिनों राजा प्राचीनबर्हिका चित्त कर्मकाण्डमें बहुत रम गया था। उन्हें अध्यात्मविद्या-विशारद परम कृपालु नारदजीने उपदेश दिया॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 533) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/25/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#417 शब्दोंके बीचका स्थान: प्रकारभगवान् → प्रकार भगवान्