विदुरजी! मैंने भगवान्के माहात्म्यको प्रकट करनेवाला यह पवित्र चरित्र तुम्हें सुना दिया। इसमें प्रेम करनेवाला पुरुष महाराज पृथुकी-सी गति पाता है॥ ३८॥✎ 411
वैचित्रवीर्याभिहितं महन्माहात्म्यसूचकम्।
अस्मिन् कृतमतिर्मर्त्यः पार्थवीं गतिमाप्नुयात्॥ ३८
विदुरजी! मैंने भगवान्के माहात्म्यको प्रकट करनेवाला यह पवित्र चरित्र तुम्हें सुना दिया। इसमें प्रेम करनेवाला पुरुष महाराज पृथुकी-सी गति पाता है॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.23.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 523) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/23/38/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#411 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में