श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.21.15

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

प्रांशुः पीनायतभुजो गौरः कञ्जारुणेक्षणः।

सुनासः सुमुखः सौम्यः पीनांसः सुद्विजस्मितः॥ १५

prāṃśuḥ pīnāyatabhujo gauraḥ kañjāruṇekṣaṇaḥ|

sunāsaḥ sumukhaḥ saumyaḥ pīnāṃsaḥ sudvijasmitaḥ|| 15

अर्थ

उनका शरीर ऊँचा, भुजाएँ भरी और विशाल, रंग गोरा, नेत्र कमलके समान सुन्दर और अरुणवर्ण, नासिका सुघड़, मुख मनोहर, स्वरूप सौम्य, कंधे ऊँचे और मुसकानसे युक्त दन्तपंक्ति सुन्दर थी॥ १५॥✎ 1332

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1332 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नक्षत्र-मण्डलमें → नक्षत्रमण्डलमें

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