पृथुके समान अन्य विज्ञजन भी सब जगहसे सार ग्रहण कर लेते हैं, अतः उन्होंने भी पृथुजीके द्वारा वशमें की हुई वसुन्धरासे अपनी-अपनी अभीष्ट वस्तुएँ दुह लीं॥ १३॥✎ 400
तथा परे च सर्वत्र सारमाददते बुधाः।
ततोऽन्ये च यथाकामं दुदुहुः पृथुभाविताम्॥ १३
पृथुके समान अन्य विज्ञजन भी सब जगहसे सार ग्रहण कर लेते हैं, अतः उन्होंने भी पृथुजीके द्वारा वशमें की हुई वसुन्धरासे अपनी-अपनी अभीष्ट वस्तुएँ दुह लीं॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 494) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/18/13/