श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तथा परे च सर्वत्र सारमाददते बुधाः।

ततोऽन्ये१ च यथाकामं दुदुहुः पृथुभाविताम्॥ १३

tathā pare ca sarvatra sāramādadate budhāḥ|

tato'nye ca yathākāmaṃ duduhuḥ pṛthubhāvitām|| 13

अर्थ

पृथुके समान अन्य विज्ञजन भी सब जगहसे सार ग्रहण कर लेते हैं, अतः उन्होंने भी पृथुजीके द्वारा वशमें की हुई वसुन्धरासे अपनी-अपनी अभीष्ट वस्तुएँ दुह लीं॥ १३॥✎ 400

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—ततः सर्वे।

    (मुद्रित पृष्ठ 494)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #400 शब्दोंके बीचका स्थान: पात्रमेंमदिरा → पात्रमें मदिरा

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