श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.14

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

ऋषयो दुदुहुर्देवीमिन्द्रियेष्वथ सत्तम।

वत्सं बृहस्पतिं कृत्वा पयश्छन्दोमयं शुचि॥ १४

ṛṣayo duduhurdevīmindriyeṣvatha sattama|

vatsaṃ bṛhaspatiṃ kṛtvā payaśchandomayaṃ śuci|| 14

अर्थ

ऋषियोंने बृहस्पतिजीको बछड़ा बनाकर इन्द्रिय (वाणी, मन और श्रोत्र) रूप पात्रमें पृथ्वीदेवीसे वेदरूप पवित्र दूध दुहा॥ १४॥✎ 400

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #400 शब्दोंके बीचका स्थान: पात्रमेंमदिरा → पात्रमें मदिरा

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