पृथ्वीके कहे हुए ये प्रिय और हितकारी वचन स्वीकार कर महाराज पृथुने स्वायम्भुव मनुको बछड़ा बना अपने हाथमें ही समस्त धान्योंको दुह लिया॥ १२॥✎ 400
इति प्रियं हितं वाक्यं भुव आदाय भूपतिः।
वत्सं कृत्वा मनुं पाणावदुहत्सकलौषधीः॥ १२
पृथ्वीके कहे हुए ये प्रिय और हितकारी वचन स्वीकार कर महाराज पृथुने स्वायम्भुव मनुको बछड़ा बना अपने हाथमें ही समस्त धान्योंको दुह लिया॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 494) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/18/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)