श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

समां च कुरु मां राजन्देववृष्टं यथा पयः।

अपर्तावपि भद्रं ते उपावर्तेत मे विभो॥ ११

samāṃ ca kuru māṃ rājandevavṛṣṭaṃ yathā payaḥ|

apartāvapi bhadraṃ te upāvarteta me vibho|| 11

अर्थ

राजन्! एक बात और है; आपको मुझे समतल करना होगा, जिससे कि वर्षा-ऋतु बीत जानेपर भी मेरे ऊपर इन्द्रका बरसाया हुआ जल सर्वत्र बना रहे—मेरे भीतरकी आर्द्रता सूखने न पावे। यह आपके लिये बहुत मंगलकारक होगा’॥ ११॥

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