श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.17.6

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

यच्चान्यदपि कृष्णस्य भवान् भगवतः प्रभोः।

श्रवः सुश्रवसः पुण्यं पूर्वदेहकथाश्रयम्॥ ६

yaccānyadapi kṛṣṇasya bhavān bhagavataḥ prabhoḥ|

śravaḥ suśravasaḥ puṇyaṃ pūrvadehakathāśrayam|| 6

अर्थ

पृथुरूपसे सर्वेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णने ही अवतार ग्रहण किया था; अतः पुण्यकीर्ति श्रीहरिके उस पृथु-अवतारसे सम्बन्ध रखनेवाले जो और भी पवित्र चरित्र हों, वे सभी आप मुझसे कहिये। मैं आपका और श्रीकृष्णचन्द्रका बड़ा अनुरक्त भक्त हूँ॥ ६-७॥✎ 1328

यह अर्थ श्लोक 6–7 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1328 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): सनत्कुमार-जीसे → सनत्कुमारजीसे

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