॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.17.16
सा दिशो विदिशो देवी रोदसी चान्तरं तयोः।
धावन्ती तत्र तत्रैनं ददर्शानूद्यतायुधम्॥ १६
sā diśo vidiśo devī rodasī cāntaraṃ tayoḥ|
dhāvantī tatra tatrainaṃ dadarśānūdyatāyudham|| 16
अर्थ
दिशा, विदिशा, स्वर्ग, पृथ्वी और अन्तरिक्षमें जहाँ-जहाँ भी वह दौड़कर जाती, वहीं उसे महाराज पृथु हथियार उठाये अपने पीछे दिखायी देते॥ १६॥✎ 1329