॥ श्रीहरिः ॥
इत्युत्तानपदः पुत्रो ध्रुवः कृष्णपरायणः।
अभूत्त्रयाणां लोकानां चूडामणिरिवामलः॥ ३८
ityuttānapadaḥ putro dhruvaḥ kṛṣṇaparāyaṇaḥ|
abhūttrayāṇāṃ lokānāṃ cūḍāmaṇirivāmalaḥ|| 38
अर्थ
इस प्रकार उत्तानपादके पुत्र भगवत्परायण श्रीध्रुवजी तीनों लोकोंके ऊपर उसकी निर्मल चूडा-मणिके समान विराजमान हुए॥ ३८॥
इत्युत्तानपदः पुत्रो ध्रुवः कृष्णपरायणः।
अभूत्त्रयाणां लोकानां चूडामणिरिवामलः॥ ३८
इस प्रकार उत्तानपादके पुत्र भगवत्परायण श्रीध्रुवजी तीनों लोकोंके ऊपर उसकी निर्मल चूडा-मणिके समान विराजमान हुए॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.12.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 471) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/12/38/