इस भीषण शस्त्रवर्षासे ध्रुवजी बिलकुल ढक गये। तब लोगोंको उनका दीखना वैसे ही बंद हो गया, जैसे भारी वर्षासे पर्वतका॥ १३॥
औत्तानपादिः स तदा शस्त्रवर्षेण भूरिणा।
न उपादृश्यतच्छन्न आसारेण यथा गिरिः॥ १३
इस भीषण शस्त्रवर्षासे ध्रुवजी बिलकुल ढक गये। तब लोगोंको उनका दीखना वैसे ही बंद हो गया, जैसे भारी वर्षासे पर्वतका॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.10.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 461) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/10/13/