अग्निदेवकी पत्नी स्वाहाने अग्निके ही अभिमानी पावक, पवमान और शुचि—ये तीन पुत्र उत्पन्न किये। ये तीनों ही हवन किये हुए पदार्थोंका भक्षण करनेवाले हैं॥ ६०॥
स्वाहाभिमानिनश्चाग्नेरात्मजांस्त्रीनजीजनत्।
पावकं पवमानं च शुचिं च हुतभोजनम्॥ ६०
अग्निदेवकी पत्नी स्वाहाने अग्निके ही अभिमानी पावक, पवमान और शुचि—ये तीन पुत्र उत्पन्न किये। ये तीनों ही हवन किये हुए पदार्थोंका भक्षण करनेवाले हैं॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 411) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/60/