श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.1.59

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ताविमौ वै भगवतो हरेरंशाविहागतौ।

भारव्ययाय च भुवः कृष्णौ यदुकुरूद्वहौ॥ ५९

tāvimau vai bhagavato hareraṃśāvihāgatau|

bhāravyayāya ca bhuvaḥ kṛṣṇau yadukurūdvahau|| 59

अर्थ

भगवान् श्रीहरिके अंशभूत वे नर-नारायण ही इस समय पृथ्वीका भार उतारनेके लिये यदुकुलभूषण श्रीकृष्ण और उन्हींके सरीखे श्यामवर्ण, कुरुकुलतिलक अर्जुनके रूपमें अवतीर्ण हुए हैं॥ ५९॥

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