॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.1.53
ययोर्जन्मन्यदो विश्वमभ्यनन्दत्सुनिर्वृतम्।
मनांसि ककुभो वाताः प्रसेदुः सरितोऽद्रयः॥ ५३
yayorjanmanyado viśvamabhyanandatsunirvṛtam|
manāṃsi kakubho vātāḥ praseduḥ sarito'drayaḥ|| 53
अर्थ
इनका जन्म होनेपर इस सम्पूर्ण विश्वने आनन्दित होकर प्रसन्नता प्रकट की। उस समय लोगोंके मन, दिशाएँ, वायु, नदी और पर्वत—सभीमें प्रसन्नता छा गयी॥ ५३॥✎ 356