॥ श्रीहरिः ॥
मूर्तिः सर्वगुणोत्पत्तिर्नरनारायणावृषी॥ ५२
mūrtiḥ sarvaguṇotpattirnaranārāyaṇāvṛṣī|| 52
अर्थ
समस्त गुणोंकी खान मूर्तिदेवीने नर-नारायण ऋषियोंको जन्म दिया॥ ५२॥✎ 356
मूर्तिः सर्वगुणोत्पत्तिर्नरनारायणावृषी॥ ५२
समस्त गुणोंकी खान मूर्तिदेवीने नर-नारायण ऋषियोंको जन्म दिया॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.1.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 410) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/1/52/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #356 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की