श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.26.60

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 26 · अथ षड्विंशोऽध्यायः

क्षुत्पिपासे ततः स्यातां समुद्रस्त्वेतयोरभूत्।

अथास्य हृदयं भिन्‍नं हृदयान्मन उत्थितम्॥ ६०

kṣutpipāse tataḥ syātāṃ samudrastvetayorabhūt|

athāsya hṛdayaṃ bhinnaṃ hṛdayānmana utthitam|| 60

अर्थ

उससे क्षुधा-पिपासाकी अभिव्यक्ति हुई और फिर उदरका अभिमानी समुद्रदेवता उत्पन्‍न हुआ। तत्पश्चात् उसके हृदय प्रकट हुआ, हृदयसे मनका प्राकट्य हुआ॥ ६०॥

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