श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.25.10

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

अथ मे देव सम्मोहमपाक्रष्टुं त्वमर्हसि।

योऽवग्रहोऽहंममेतीत्येतस्मिन् योजितस्त्वया॥ १०

atha me deva sammohamapākraṣṭuṃ tvamarhasi|

yo'vagraho'haṃmametītyetasmin yojitastvayā|| 10

अर्थ

देव! इन देह-गेह आदिमें जो मैं-मेरेपनका दुराग्रह होता है, वह भी आपका ही कराया हुआ है; अतः अब आप मेरे इस महामोहको दूर कीजिये॥ १०॥

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