आप सम्पूर्ण जीवोंके स्वामी भगवान् आदिपुरुष हैं तथा अज्ञानान्धकारसे अन्धे पुरुषोंके लिये नेत्रस्वरूप सूर्यकी भाँति उदित हुए हैं॥ ९॥
य आद्यो भगवान् पुंसामीश्वरो वै भवान् किल।
लोकस्य तमसान्धस्य चक्षुः सूर्य इवोदितः॥ ९
आप सम्पूर्ण जीवोंके स्वामी भगवान् आदिपुरुष हैं तथा अज्ञानान्धकारसे अन्धे पुरुषोंके लिये नेत्रस्वरूप सूर्यकी भाँति उदित हुए हैं॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.25.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 357) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/25/9/