फिर वे मुनिवर कर्दमसे पूछकर, उनकी आज्ञा ले रानीके सहित रथपर सवार हुए और अपने सेवकोंसहित ऋषिकुलसेवित सरस्वती नदीके दोनों तीरोंपर मुनियोंके आश्रमोंकी शोभा देखते हुए अपनी राजधानीमें चले आये॥ २६-२७॥
यह व्याख्या श्लोक 3.22.26 से 3.22.27 तककी एक साथ है।
उभयोर्ऋषिकुल्यायाः सरस्वत्याः सुरोधसोः।
ऋषीणामुपशान्तानां पश्यन्नाश्रमसम्पदः॥ २७
फिर वे मुनिवर कर्दमसे पूछकर, उनकी आज्ञा ले रानीके सहित रथपर सवार हुए और अपने सेवकोंसहित ऋषिकुलसेवित सरस्वती नदीके दोनों तीरोंपर मुनियोंके आश्रमोंकी शोभा देखते हुए अपनी राजधानीमें चले आये॥ २६-२७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.22.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 344) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/22/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1011 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): उभयोऋर्षिकुल्याया: → उभयोऋर्ऋषिकुल्यायाः
#1012 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): उभयोऋर्ऋषिकुल्याया: → उभयोर्ऋषिकुल्यायाः