श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.27

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

उभयोर्ऋषिकुल्यायाः सरस्वत्याः सुरोधसोः।✎ 1011 1012

ऋषीणामुपशान्तानां पश्यन्‍नाश्रमसम्पदः॥ २७

ubhayor:ṛṣikulyāyāḥ sarasvatyāḥ surodhasoḥ|

ṛṣīṇāmupaśāntānāṃ paśyannāśramasampadaḥ|| 27

अर्थ

फिर वे मुनिवर कर्दमसे पूछकर, उनकी आज्ञा ले रानीके सहित रथपर सवार हुए और अपने सेवकोंसहित ऋषिकुलसेवित सरस्वती नदीके दोनों तीरोंपर मुनियोंके आश्रमोंकी शोभा देखते हुए अपनी राजधानीमें चले आये॥ २६-२७॥

यह व्याख्या श्लोक 3.22.26 से 3.22.27 तककी एक साथ है।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1011 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): उभयोऋर्षिकुल्याया: → उभयोऋर्ऋषिकुल्यायाः
  • #1012 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): उभयोऋर्ऋषिकुल्याया: → उभयोर्ऋषिकुल्यायाः

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