श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.28

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

तमायान्तमभिप्रेत्य ब्रह्मावर्तात्प्रजाः पतिम्।

गीतसंस्तुतिवादित्रैः प्रत्युदीयुः प्रहर्षिताः॥ २८

tamāyāntamabhipretya brahmāvartātprajāḥ patim|

gītasaṃstutivāditraiḥ pratyudīyuḥ praharṣitāḥ|| 28

अर्थ

जब ब्रह्मावर्तकी प्रजाको यह समाचार मिला कि उसके स्वामी आ रहे हैं तब वह अत्यन्त आनन्दित होकर स्तुति, गीत एवं बाजे-गाजेके साथ अगवानी करनेके लिये ब्रह्मावर्तकी राजधानीसे बाहर आयी॥ २८॥✎ 304 305

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #304 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीयज्ञभगवान् की → श्रीयज्ञभगवान्‌की
  • #305 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीवराहभगवान् से → श्रीवराहभगवान्‌से

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