जब ब्रह्मावर्तकी प्रजाको यह समाचार मिला कि उसके स्वामी आ रहे हैं तब वह अत्यन्त आनन्दित होकर स्तुति, गीत एवं बाजे-गाजेके साथ अगवानी करनेके लिये ब्रह्मावर्तकी राजधानीसे बाहर आयी॥ २८॥✎ 304305
तमायान्तमभिप्रेत्य ब्रह्मावर्तात्प्रजाः पतिम्।
गीतसंस्तुतिवादित्रैः प्रत्युदीयुः प्रहर्षिताः॥ २८
जब ब्रह्मावर्तकी प्रजाको यह समाचार मिला कि उसके स्वामी आ रहे हैं तब वह अत्यन्त आनन्दित होकर स्तुति, गीत एवं बाजे-गाजेके साथ अगवानी करनेके लिये ब्रह्मावर्तकी राजधानीसे बाहर आयी॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.22.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 344) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/22/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#304 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीयज्ञभगवान् की → श्रीयज्ञभगवान्की
#305 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीवराहभगवान् से → श्रीवराहभगवान्से