श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.20.51

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

अहो एतज्जगत्स्रष्टः सुकृतं बत ते कृतम्।

प्रतिष्ठिताः क्रिया यस्मिन् साकमन्‍नमदामहे॥ ५१

aho etajjagatsraṣṭaḥ sukṛtaṃ bata te kṛtam|

pratiṣṭhitāḥ kriyā yasmin sākamannamadāmahe|| 51

अर्थ

वे बोले, ‘विश्‍वकर्ता ब्रह्माजी! आपकी यह (मनुओंकी) सृष्टि बड़ी ही सुन्दर है। इसमें अग्‍निहोत्र आदि सभी कर्म प्रतिष्ठित हैं। इसकी सहायतासे हम भी अपना अन्‍न (हविर्भाग) ग्रहण कर सकेंगे’॥ ५१॥✎ 296

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #296 शब्दोंके बीचका स्थान: आदिसभी → आदि सभी

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