तान् दृष्ट्वा ये पुरा सृष्टाः प्रशशंसुः प्रजापतिम्॥ ५०
tebhyaḥ so'tyasṛjatsvīyaṃ puraṃ puruṣamātmavān|
tān dṛṣṭvā ye purā sṛṣṭāḥ praśaśaṃsuḥ prajāpatim|| 50
अर्थ
मनस्वी ब्रह्माजीने उनके लिये अपना पुरुषाकार शरीर त्याग दिया। मनुओंको देखकर उनसे पहले उत्पन्न हुए देवता-गन्धर्वादि ब्रह्माजीकी स्तुति करने लगे॥ ५०॥✎ 296
तेभ्यः सोऽत्यसृजत्स्वीयं पुरं पुरुषमात्मवान्।
तान् दृष्ट्वा ये पुरा सृष्टाः प्रशशंसुः प्रजापतिम्॥ ५०
मनस्वी ब्रह्माजीने उनके लिये अपना पुरुषाकार शरीर त्याग दिया। मनुओंको देखकर उनसे पहले उत्पन्न हुए देवता-गन्धर्वादि ब्रह्माजीकी स्तुति करने लगे॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 334) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/3/20/50/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)