श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.34

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

अन्येषां पुण्यश्लोकानामुद्दामयशसां सताम्।

उपश्रुत्य भवेन्मोदः श्रीवत्साङ्कस्य किं पुनः॥ ३४

anyeṣāṃ puṇyaślokānāmuddāmayaśasāṃ satām|

upaśrutya bhavenmodaḥ śrīvatsāṅkasya kiṃ punaḥ|| 34

अर्थ

जब अन्य पवित्रकीर्ति और परम यशस्वी महापुरुषोंका चरित्र सुननेसे ही बड़ा आनन्द होता है, तब श्रीवत्सधारी भगवान्‌की ललित-ललाम लीलाओंकी तो बात ही क्या है॥ ३४॥✎ 289 290

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #289 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #290 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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