श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.33

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

सूत उवाच

इति कौषारवाख्यातामाश्रुत्य भगवत्कथाम्।

क्षत्ताऽऽनन्दं परं लेभे महाभागवतो द्विज॥ ३३

iti kauṣāravākhyātāmāśrutya bhagavatkathām|

kṣattā''nandaṃ paraṃ lebhe mahābhāgavato dvija|| 33

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकजी! मैत्रेयजीके मुखसे भगवान्‌की यह कथा सुनकर परम भागवत विदुरजीको बड़ा आनन्द हुआ॥ ३३॥✎ 289 290

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #289 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #290 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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