॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.19.32
मया यथानूक्तमवादि ते हरेः
कृतावतारस्य सुमित्र चेष्टितम्।
यथा हिरण्याक्ष उदारविक्रमो
महामृधे क्रीडनवन्निराकृतः॥ ३२
mayā yathānūktamavādi te hareḥ
kṛtāvatārasya sumitra ceṣṭitam|
yathā hiraṇyākṣa udāravikramo
mahāmṛdhe krīḍanavannirākṛtaḥ|| 32
अर्थ
भगवान् अवतार लेकर जैसी लीलाएँ करते हैं और जिस प्रकार उन्होंने भीषण संग्राममें खिलौनेकी भाँति महापराक्रमी हिरण्याक्षका वध कर डाला, मित्र विदुरजी! वह सब चरित जैसा मैंने गुरुमुखसे सुना था, तुम्हें सुना दिया॥ ३२॥