श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.31

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

एवं हिरण्याक्षमसह्यविक्रमं

स सादयित्वा हरिरादिसूकरः।

जगाम लोकं स्वमखण्डितोत्सवं

समीडितः पुष्करविष्टरादिभिः॥ ३१

evaṃ hiraṇyākṣamasahyavikramaṃ

sa sādayitvā harirādisūkaraḥ|

jagāma lokaṃ svamakhaṇḍitotsavaṃ

samīḍitaḥ puṣkaraviṣṭarādibhiḥ|| 31

अर्थ

मैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार महापराक्रमी हिरण्याक्षका वध करके भगवान् आदिवराह अपने अखण्ड आनन्दमय धामको पधार गये। उस समय ब्रह्मादि देवता उनकी स्तुति कर रहे थे॥ ३१॥

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