मैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार महापराक्रमी हिरण्याक्षका वध करके भगवान् आदिवराह अपने अखण्ड आनन्दमय धामको पधार गये। उस समय ब्रह्मादि देवता उनकी स्तुति कर रहे थे॥ ३१॥
एवं हिरण्याक्षमसह्यविक्रमं
स सादयित्वा हरिरादिसूकरः।
जगाम लोकं स्वमखण्डितोत्सवं
समीडितः पुष्करविष्टरादिभिः॥ ३१
मैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार महापराक्रमी हिरण्याक्षका वध करके भगवान् आदिवराह अपने अखण्ड आनन्दमय धामको पधार गये। उस समय ब्रह्मादि देवता उनकी स्तुति कर रहे थे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 327) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/31/