श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.16.31

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

मयि संरम्भयोगेन निस्तीर्य ब्रह्महेलनम्।

प्रत्येष्यतं निकाशं मे कालेनाल्पीयसा पुनः॥ ३१

mayi saṃrambhayogena nistīrya brahmahelanam|

pratyeṣyataṃ nikāśaṃ me kālenālpīyasā punaḥ|| 31

अर्थ

अब दैत्ययोनिमें मेरे प्रति क्रोधाकार वृत्ति रहनेसे तुम्हें जो एकाग्रता होगी उससे तुम इस विप्र-तिरस्कारजनित पापसे मुक्त हो जाओगे और फिर थोड़े ही समयमें मेरे पास लौट आओगे॥ ३१॥✎ 270 271

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #270 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #271 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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