श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.15.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

स त्वं विधत्स्व शं भूमंस्तमसा लुप्तकर्मणाम्।

अदभ्रदयया दृष्ट्या आपन्‍नानर्हसीक्षितुम्॥ ९

sa tvaṃ vidhatsva śaṃ bhūmaṃstamasā luptakarmaṇām|

adabhradayayā dṛṣṭyā āpannānarhasīkṣitum|| 9

अर्थ

भूमन्! इस अन्धकारके कारण दिन-रातका विभाग अस्पष्ट हो जानेसे लोकोंके सारे कर्म लुप्त होते जा रहे हैं, जिससे वे दुःखी हो रहे हैं; उनका कल्याण कीजिये और हम शरणागतोंकी ओर अपनी अपार दयादृष्टिसे निहारिये॥ ९॥

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