श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.15.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

यस्य वाचा प्रजाः सर्वा गावस्तन्त्येव यन्त्रिताः।

हरन्ति बलिमायत्तास्तस्मै मुख्याय४ ते नमः॥ ८

yasya vācā prajāḥ sarvā gāvastantyeva yantritāḥ|

haranti balimāyattāstasmai mukhyāya te namaḥ|| 8

अर्थ

रस्सीसे बँधे हुए बैलोंकी भाँति आपकी वेदवाणीसे जकड़ी हुई सारी प्रजा आपकी अधीनतामें नियमपूर्वक कर्मानुष्ठान करके आपको बलि समर्पित करती है। आप सबके नियन्ता मुख्य प्राण हैं, हम आपको नमस्कार करते हैं॥ ८॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्रा० पा०—मुख्यात्मने नमः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 304)

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