श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

दितिरुवाच

एष मां त्वत्कृते विद्वन् काम आत्तशरासनः।

दुनोति दीनां विक्रम्य रम्भामिव मतङ्गजः॥ ९

eṣa māṃ tvatkṛte vidvan kāma āttaśarāsanaḥ|

dunoti dīnāṃ vikramya rambhāmiva mataṅgajaḥ|| 9

अर्थ

दितिने कहा—विद्वन्! मतवाला हाथी जैसे केलेके वृक्षको मसल डालता है, उसी प्रकार यह प्रसिद्ध धनुर्धर कामदेव मुझ अबलापर जोर जताकर आपके लिये मुझे बेचैन कर रहा है॥ ९॥✎ 258

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #258 शब्दोंके बीचका स्थान: जैसेकेलेके → जैसे केलेके

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