श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.8

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

इष्ट्वाग्‍निजिह्वं पयसा पुरुषं यजुषां पतिम्।

निम्लोचत्यर्क आसीनमग्न्यगारे समाहितम्॥ ८

iṣṭvāgnijihvaṃ payasā puruṣaṃ yajuṣāṃ patim|

nimlocatyarka āsīnamagnyagāre samāhitam|| 8

अर्थ

उस समय कश्यपजी खीरकी आहुतियोंद्वारा अग्‍निजिह्व भगवान् यज्ञपतिकी आराधना कर सूर्यास्तका समय जान अग्‍निशालामें ध्यानस्थ होकर बैठे थे॥ ८॥✎ 1967

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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