उस समय कश्यपजी खीरकी आहुतियोंद्वारा अग्निजिह्व भगवान् यज्ञपतिकी आराधना कर सूर्यास्तका समय जान अग्निशालामें ध्यानस्थ होकर बैठे थे॥ ८॥✎ 1967
इष्ट्वाग्निजिह्वं पयसा पुरुषं यजुषां पतिम्।
निम्लोचत्यर्क आसीनमग्न्यगारे समाहितम्॥ ८
उस समय कश्यपजी खीरकी आहुतियोंद्वारा अग्निजिह्व भगवान् यज्ञपतिकी आराधना कर सूर्यास्तका समय जान अग्निशालामें ध्यानस्थ होकर बैठे थे॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 299) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/14/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1967 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उसीके → उसीको