prajāvatīnāṃ bhadraṃ te mayyāyuṅktāmanugraham|| 10
अर्थ
अपनी पुत्रवती सौतोंकी सुख-समृद्धिको देखकर मैं ईर्ष्याकी आगसे जली जाती हूँ। अतः आप मुझपर कृपा कीजिये, आपका कल्याण हो॥ १०॥✎ 258
तद्भवान्दह्यमानायां सपत्नीनां समृद्धिभिः।
प्रजावतीनां भद्रं ते मय्यायुङ्क्तामनुग्रहम्॥ १०
अपनी पुत्रवती सौतोंकी सुख-समृद्धिको देखकर मैं ईर्ष्याकी आगसे जली जाती हूँ। अतः आप मुझपर कृपा कीजिये, आपका कल्याण हो॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 299) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/14/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#258 शब्दोंके बीचका स्थान: जैसेकेलेके → जैसे केलेके