श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.50

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

श्रुत्वा भागवतं पौत्रममोदत दितिर्भृशम्।

पुत्रयोश्‍च वधं कृष्णाद्विदित्वाऽऽसीन्महामनाः॥ ५०

śrutvā bhāgavataṃ pautramamodata ditirbhṛśam|

putrayośca vadhaṃ kṛṣṇādviditvā''sīnmahāmanāḥ|| 50

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! दितिने जब सुना कि मेरा पौत्र भगवान्‌का भक्त होगा, तब उसे बड़ा आनन्द हुआ तथा यह जानकर कि मेरे पुत्र साक्षात् श्रीहरिके हाथसे मारे जायँगे, उसे और भी अधिक उत्साह हुआ॥ ५०॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां तृतीयस्कन्धे दितिकश्यपसंवादे चतुर्दशोऽध्यायः॥ १४॥

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