॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 3.14.24
श्मशानचक्रानिलधूलिधूम्र-
विकीर्णविद्योतजटाकलापः ।
भस्मावगुण्ठामलरुक्मदेहो
देवस्त्रिभिः पश्यति देवरस्ते॥ २४
śmaśānacakrāniladhūlidhūmra-
vikīrṇavidyotajaṭākalāpaḥ |
bhasmāvaguṇṭhāmalarukmadeho
devastribhiḥ paśyati devaraste|| 24
अर्थ
जिनका जटाजूट श्मशानभूमिसे उठे हुए बवंडरकी धूलिसे धूसरित होकर देदीप्यमान हो रहा है तथा जिनके सुवर्ण-कान्तिमय गौर शरीरमें भस्म लगी हुई है, वे तुम्हारे देवर (श्वशुर) महादेवजी अपने सूर्य, चन्द्रमा और अग्निरूप तीन नेत्रोंसे सभीको देखते रहते हैं॥ २४॥